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नन्दजी को वरुण ने क्यों कैद किया और गोपों को श्रीकृष्ण ने कैसे अपने धाम का दर्शन कराया?- भाग 25            

वरूण देव के रक्षकों द्वारा नंदजी को पकड़ लेना एक बार की बात है। नंदजी ने कार्तिक शुक्ल एकादशी का उपवास किया और भगवान की पूजा की। उसी रात में द्वादशी लगने पर स्नान के लिए यमुना जल में प्रवेश किया। इस समय अधिक रात्री थी, जो कि असुरों का समय होता है। उस समय …

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कृष्ण का गोविंद पद पर अभिषेक किसने और क्यो किया था?-  भाग 24

श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन उठाने के बाद इंद्र का पश्चाताप देवराज इन्द्र ने क्रोध और अभिमान में आकर ब्रज भूमि को डुबाने के लिए अपने मेघों को भेज दिया लेकिन बाद में उन्हें अपनी भूल पर पश्चाताप हुआ। वे श्रीकृष्ण से क्षमा मांगने आए। गोलोक से कामधेनु गाय भी उसी समय श्रीकृष्ण को बधाई देने के …

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श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को क्यों उंगली पर उठाया?- भाग 23

श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र यज्ञ रोकना एक दिन श्रीकृष्ण ने देखा कि ब्रज में सभी गोप इन्द्रयज्ञ की तैयारी कर रहे है। सबकुछ जानने के बावजूद उन्होने अपने पिता से पूछा कि यह किस उत्सव की तैयारी हो रही है। नंदजी ने उन्हें बताया कि इन्द्र वर्षा करने वाले मेघों के स्वामी है। यह यज्ञ उनको प्रसन्न करने के लिए …

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श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण पत्नियों से क्यों भोजन माँगा?- भाग 22 

ब्राह्मणों से भोजन की याचना  एक दिन श्रीकृष्ण और बलराम अन्य ग्वालबालों के साथ गाय चराते हुए दूर निकल गए। ग्रीष्म ऋतु थी। सूर्य की किरणें प्रखर हो रही थी लेकिन घने वृक्ष उनपर छाया कर रहे थे। श्रीकृष्ण ने अपने मित्रों से इन वृक्षों की महिमा और उनके द्वारा किए गए उपकार के बारे में बातें की। बातें …

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कृष्ण ने गोपियों का वस्त्र हरण क्यों किया था?-भाग 21

वस्त्र-हरण प्रसंग गोपियों की कृष्णभक्ति को प्रेम-क्रीड़ा का रूप भागवत के जिस प्रसंग के आधार पर दिया गया है, उनमे से पहला यही प्रसंग है अर्थात– गोपियों द्वारा उन्हें पति रूप में पाने के लिए व्रत और कृष्ण द्वारा उनके वस्त्रों को चुराना। इस प्रसंग में अनेक विचार और मत दिए गए हैं। पर उससे …

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गोपियों की कृष्णभक्ति-भाग 20 

गोपियों की कृष्णभक्ति गोपियों की कृष्णभक्ति कृष्ण के चरित का एक ऐसा पक्ष है जो महाभारत सहित अनेक युद्ध करने वाले महान योद्धा, रणनीतिकार, अजेय नारायणी सेना के संगठनकर्ता और गीता के रचनाकार श्रीकृष्ण के चरित के मधुर पक्ष को उजागर करता है। साथ ही कुछ लोग उनके चरित पर प्रश्न भी खड़े करते हैं। …

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कृष्ण-बलराम ने प्रलंबासुर का वध क्यों और कैसे किया?- भाग 19 

प्रलंबासुर द्वारा कृष्ण-बलराम के अपहरण का प्रयास     एक दिन जब बलराम और श्रीकृष्ण ग्वाल बालों के वृंदावन में गाय चरा रहे थे तब ग्वाल के वेश में प्रलंब नाम का एक असुर आया। उसका उद्देश्य कृष्ण और बलराम का अपहरण कर ले जाना था। सर्वज्ञ भगवान उसे देखते ही पहचान गए। फिर भी उन्होंने उसकी मित्रता का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। वे मन-ही-मन उसके वध की युक्ति …

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श्रीकृष्ण ने आग से बृजवासियों की रक्षा कैसे किया?-भाग 18

वृजवासियों पर आग का संकट    कालिय नाग का मान मर्दन कर कृष्ण जब आए तब उनसे मिलने और दान आदि के बाद ब्रजवासी और गाएँ सब बहुत थक गए थे। भूख-प्यास भी लगी हुई थी। गर्मी का समय था। अतः सभी बृजवासी वहीं पर यमुना नदी के किनारे ही सो गए। गर्मी का मौसम होने के कारण …

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कालिय नाग कौन था और श्रीकृष्ण ने क्यों व कैसे उसका मानमर्दन किया?-  भाग 17          

कालिय नाग कौन था?   कालिय नाग अत्यंत विषैला और विशाल नाग अर्थात सांप था जो अपने परिवार और मित्रों के साथ यमुना जी के कालीदह नामक स्थान (कुंड) में रहता था। उसके विष के प्रभाव और वेग से वहाँ का पानी अत्यंत वेगवान रहता था। उस विषैले पानी का तापमान इतना था कि उसकी …

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श्रीकृष्ण ने धेनुक को क्यों मारा?-भाग 16

धेनुक का अत्याचार एक दिन जब कृष्ण और बलराम अपने ग्वालसखाओं के साथ गाय चरा रहे थे, तब उनके सखा श्रीदामा, सुबल और स्तोक कृष्ण (छोटा कृष्ण) आदि ने उन्हें निकट ही स्थित एक ताड़ वन के विषय में बताया। वहाँ के ताड़ फल बहुत स्वादिष्ट होते हैं लेकिन वहाँ रहने वाले दुष्ट राक्षस धेनुक के डर …

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