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मेघनाद का वध किसने किया?-भाग 53         

अभी तक कुंभकर्ण सहित अधिकांश राक्षस सेनापति युद्ध में मारे जा चुके थे। स्वयं रावण भी राम के हाथों अपमानजनक रूप से पराजित हो चुका था। वानर सेना द्वारा लंका नगर में हमला से स्पष्ट हो चुका था कि अब राक्षस शक्ति इतनी सक्षम भी नहीं रही गई थी कि अपने नगर की रक्षा कर …

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सुग्रीव ने रात को लंका नगर पर आक्रमण क्यों किया?-भाग 52

मेघनाद के क्षणिक जीत से राक्षसों का मनोबल फिर बढ़ गया था। इधर घायल और मरे हुए राम सेना के जीवित और स्वस्थ होने से उनका मनोबल भी बढ़ गया था। सामान्यतः रात में युद्ध नहीं होता था लेकिन ये नियम तो राक्षस सेना पहले दिन से ही तोड़ चुकी थी। अब युद्ध दिन रात …

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मेघनाद दुबारा युद्ध में क्यों आया?-भाग 51          

राम-रावण युद्ध में अब तक कुंभकर्ण सहित लगभग सारे प्रमुख योद्धा और सेनापति मारे जा चुके थे। स्वयं रावण भी एक बार राम से हार चुका था। केवल मेघनाद ही ऐसा योद्ध था जो बिना हारे या मरे युद्धभूमि से लौटा था। इतना ही नहीं उसने राम-लक्ष्मण को घायल भी कर दिया था। अतः पिता …

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राम-रावण की पहली मुठभेड़ कब हुई और इसका क्या परिणाम हुआ?-भाग 49         

मेघनाद के द्वारा राम-लक्ष्मण के घायल होने और नागपाश में बंध जाने पर राक्षस सेना में जीत की खुशी छा गई थी। रावण ने अपने बेटे मेघनाद का इस कार्य के लिए बहुत सम्मान किया। राक्षस सेना मान रही थी कि अपने मुख्य सेनापति की मृत्यु के बाद राम सेना खुद ही लौट जाएगी। इसीलिए …

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सीता के अपहरण की योजना-भाग 29       

अकंपन द्वारा रावण को दंडकारण्य में राक्षसों के संहार की सूचना देना खर-दूषण और राम के युद्ध में से जो कुछ राक्षस भाग कर जीवित बच गए थे, उनमें से एक का नाम था अकम्पन। वह भाग कर लंका राक्षसराज रावण के पास पहुँचा। उसके खर-दूषण आदि के साथ दंड्कारण्य के अधिकांश राक्षसों का राम …

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