मधुराष्टकम

कहा जाता है कि एक बार सावन के शुक्ल पक्ष के एकादशी को आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण वल्लभाचार्य के सामने प्रकट हुए। तब आचार्य ने उनकी स्तुति में मधुराष्टकम की रचना की थी। मधुराष्टक, जिसे संस्कृत में मधुराष्टकम कहते हैं, दो शब्दों से मिल कर बना है– मधुर और अष्टकम यानि आठ का समूह। …

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