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कृष्ण गोकुल छोड़ कर वृन्दावन क्यों गए?-भाग 12

श्रीकृष्ण की बाललीलाएँ मथुरा और गोकुल के बाद वृंदावन में हुई। गोकुल से वृंदावन जाने की कथा इस तरह है। वृन्दावन प्रस्थान के कारण एक दिन गोकुल में होने वाले उत्पातों पर विचार करने के लिए नंद बाबा और बड़े-बूढ़े गोप इकट्ठे हुए। विचार का विषय यह था कि महावन (गोकुल) में होने वाले उत्पातों …

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यमलार्जुन कौन थे और कृष्ण ने उनका उद्धार कैसे किया?-भाग 11

यमलार्जुन उद्धार श्रीकृष्ण की एक प्रमुख बाललीला है। जब उन्होंने चलना सीखा ही था, तभी इस छोटी-सी उम्र में जिस ऊखल में वे बंधे थे, उससे अर्जुन के दो जुड़वा वृक्षों को उखाड़ दिया था। श्रीकृष्ण की शरारतें कार्तिक मास की बात है। माता यशोदा श्रीकृष्ण जी के लिए दही मथ कर माखन बना रही …

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कृष्ण-बलराम का नामकरण और उनकी बाल लीलाएँ- भाग 10

गर्गाचार्य का गोकुल आना शूरसेन यदुवंश के कुलपुरोहित श्री गर्गाचार्य एक दिन गोकुल आए। उनका सभी यदुवंशी बहुत सम्मान करते थे। नंदजी ने उनकी बहुत प्रकार से सेवा और सम्मान किया तथा अपने दोनों बालकों का नामकरण करने के लिए आग्रह किया। लेकिन आचार्य ने उन्हें यह कार्य गुप्त रूप से करने का सलाह दिया। …

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नन्द-यशोदा को भगवान की बाललीला देखने का सौभाग्य क्यों मिला था?-भाग 9   

नंदजी और यशोदा जी के पूर्व जन्म की कथा भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन सुनते हुए राजा परीक्षित ने जिज्ञासा प्रकट किया कि नन्द और यशोदा ने ऐसा क्या पुण्य किया था कि उन्हे भगवान से पुत्रवत स्नेह करने और उनकी बाल लीलाओं से आनंदित होने का सौभाग्य मिला जबकि वसुदेव और देवकी इस …

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ऊत्कच और तृणावर्त कौन थे और कृष्ण ने उनका उद्धार कैसे किया?-भाग 8 

ऊत्कच का उद्धार पूतना वध के बाद श्रीकृष्ण ने जिस दूसरे व्यक्ति का उद्धार किया, वह था ऊत्कच। लेकिन वह उन्हें मारने नहीं बल्कि शाप से मुक्ति पाने के लिए आया था। वह उसकी इच्छा को जानते थे। इसलिए उसकी पूर्ति की। अपने पैरों के स्पर्श से उसे मुक्त किया। हुआ यह कि भगवान कृष्ण …

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कृष्ण ने सबसे पहले किस राक्षस का वध किया?-भाग 7

पूतना वध कृष्ण जन्म का एक उद्देश्य था अत्याचारी राक्षसों का अंत करना। इस कार्य का आरंभ किसी पुरुष राक्षस से नहीं बल्कि एक स्त्री यानि राक्षसी पूतना के वध से हुआ। वे स्त्री वध नहीं करते लेकिन जब पूतना स्वयं ही उनका वध करने आ गई तो इस बाल घातिनी को उसके कर्मों का …

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कृष्ण जन्म की सूचना के बाद कंस ने क्या रणनीति अपनाया?-भाग 6     

कंस को देवकी की संतान होने की सूचना  अब वह शिशु कन्या एक साधारण बालिका की तरह रोने लगी। शिशु के रोने की ध्वनि सुनकर द्वारपालों की नींद खुली। द्वारपालों ने जाकर भोजराज कंस को देवकी के संतान जन्म की सूचना दी। कंस तो बड़ी आकुलता से इसकी प्रतीक्षा कर ही रहा था। सूचना मिलते ही …

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कृष्ण-बलराम का अवतरण कहाँ हुआ था और वे गोकुल कैसे पहुँचे?-भाग 5    

बलराम जी देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में जाना कंस ने क्रमशः देवकी के छः पुत्रों को मार डाला। सातवें पुत्र के रूप मे उनके गर्भ में भगवान के अंशस्वरूप श्रीशेष जी आए।   वसुदेव की पहली पत्नी रोहिणी इस समय कंस के भय से गोकुल में नन्द जी के यहाँ छुप कर …

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कंस श्रीकृष्ण को अपना शत्रु क्यों मानता था?- भाग 4    

कंस का देवकी से वैर मानना कंस अपने चाचा देवक की पुत्री यानि अपनी चचेरी बहन देवकी से बहुत प्रेम करता था। देवकी का विवाह शूरसेन वंश के वसुदेव से हुआ। जैसा कि पहले ही भगवान ने देवताओं को बता दिया था कि वे यदु वंश में देवकी-वसुदेव के पुत्र के रूप में पृथ्वी पर …

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