kaun thi bhagwan ram ki bahan

कौन थी भगवान श्रीराम की बहन?-भाग 4 

तुलसीदास कृत रामचरितमानस में केवल राम चारों भाइयों का ही विवरण हैं, उनके किसी बहन का नहीं। लेकिन दक्षिण-पूर्व एशिया, विशेषकर थाईलैंड में राम कथा का जो रूप प्रचलित है, वह श्रीराम की एक बहन होने की बात बताता है। भारत के कुछ हिस्सों प्रचलित राम कथा में भी उनकी बहन का उल्लेख आता है। कुछ रूपांतरण में तो सीता के वनवास में उनकी ननद यानि राम की बहन की भूमिका का भी जिक्र है। लेकिन रामकथा के सबसे मूल स्रोत वाल्मीकि रामायण में राम की बहन का उल्लेख अलग प्रकार से है।

ऋषि ऋष्यशृंग और राजा दशरथ में संबंध

संबंध की दृष्टि से पुत्रेष्ठी यज्ञ करने वाले ऋषि ऋष्यशृंग दशरथ के दामाद यानि भगवान राम की इकलौती बड़ी बहन के पति थे। लेकिन यह बहन जन्म के बाद ही गोद दे दी गई थी। इसलिए शांता कभी भी अपने जन्म देने वाले पिता के घर संभवतः नहीं रही। उसके केवल एक बार, पुत्रेष्टि यज्ञ के समय, अयोध्या आने का उल्लेख रामायण में है।

श्रीराम की बहन के संबंध में उल्लेख

विभिन्न ग्रंथों (मुख्यरूप से वाल्मीकि रामायण और विष्णु पुराण) से जो जानकारी मिलती है, उसके अनुसार विवाह के बाद राजा दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या ने एक पुत्री को जन्म दिया था। जिसे उन्होने गोद दे दिया। इसके बाद उन्हें और कोई संतान नहीं हो सकी जिससे वंश समाप्ती का भय उत्पन्न हो गया। इसीलिए राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्ठी यज्ञ किया। यह यज्ञ उनके दामाद ऋष्यशृंग द्वारा कराने का वर्णन है। इस यज्ञ के लिए विशेष रूप से उन्होंने अपने बेटी और दामाद को बुलाया था।

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शांता का जन्म और गोद किया जाना

रानी कौशल्या की एक बहन थी जिनका नाम था वर्षीनी। उसका विवाह अंग देश के राजा रोमपाद से हुआ था। दोनों दंपत्ति बहुत ही अच्छे और भगवान के भक्त थे। राजा दशरथ की रिश्तेदारी के साथ-साथ रोमपाद से बहुत अच्छी मित्रता भी थी। वर्षीनी और रोमपाद को विवाह के बहुत वर्ष बीत जाने पर भी कोई संतान नहीं थी। इसलिए वर्षीनी से अपनी बहन कौशल्या से उनकी पुत्री गोद दे देने के लिए विनती की। अतः दशरथ-कौशल्या ने अपनी पहली संतान, अपनी पुत्री, वर्षीनी-रोमपाद को दे दिया।

इसके बाद वह शिशु कन्या अपने गोद लेने वाले माता-पिता के पास अंग देश में ही रही। वह त्यागशील और भगवान की भक्ति थी। उस पुत्री का नाम शांता रखा गया।

राजा दशरथ के यज्ञ के बाद ऋष्यशृंग-शांता दोनों वन में तपस्या करने चले गए। ऋष्यशृंग की गिनती भारत के महान ऋषियों में होती है। वर्तमान ऋषिवंशी राजपुत्र (राजपूत) अपनी उत्पत्ति इसी युगल से मानते हैं। शांता को यद्यपि अपने चार महान भाइयों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न इतनी प्रसिद्धि नहीं मिली लेकिन त्याग, तपस्या, सत्य, ज्ञान और अन्य सद्गुणों में वह अपने महान परिवार की परंपरा के अनुरूप ही थी। 

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