शिव को महादेव क्यों कहते हैं?

सभी देवों में, जिनमें ब्रह्मा और विष्णु भी शामिल हैं, केवल भगवान शंकर को ही महादेव की उपाधि मिली हुई है। पर क्यों?

शिव का रूप और उनकी प्रकृति बड़ी अद्भुत और एक-दूसरे से विपरीत लगती है। वे शिव यानि कल्याणकारी हैं, आशुतोष यानि जल्दी खुश हो जाने वाले हैं, तो दूसरी तरह वे सबसे बड़े विध्वंसक भी है। वे इच्छाओं से रहित हैं। फिर क्यों और किसका विध्वंस करते हैं? वे इच्छाओं और अज्ञान का विनाश करते हैं। उन्हें स्वयं कुछ नहीं चाहिए फिर भी दूसरों की रक्षा के लिए विष पीते हैं, इसलिए वे महादेव हैं।  

कुछ ग्रंथ उन्हें इसलिए भी महादेव मानते हैं कि उन्हें सभी देवताओं से अधिक सिद्धि और शक्ति प्राप्त है, वे आदि देव हैं, सभी योग, ज्ञान, वैराग्य का उद्गम उनसे ही हुआ है।

एक कथा यह भी है कि तरिकासुर के तीन पुत्रों-त्रिपुर- के अत्याचार को खत्म करने के लिए देवताओं  ने शिव की शक्ति नहीं लिया क्योंकि उनकी शक्ति धारण करने में वे सक्षम नहीं थे। देवताओं ने शिव  को अपनी-अपनी शक्ति का भाग दे दिया। सभी देवताओं की शक्ति शिव में आने के कारण ही उन्हें महादेव कहा गया।

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