भगवान श्रीकृष्ण ने क्या सच में ‘लड़की भगाया’ था?

किसी ने मुझ से मज़ाक में पूछा आप लीगल फील्ड से हो, अगर आज का कानून द्वापर में होता तो भगवान कृष्ण को लड़की भगाने के जुर्म में क्या सजा मिलती?

इसका सिम्पल आन्सर तो यही होगा कि ‘जिसे आजकल बोलचाल में लड़की भगाना’ कहते हैं, उसे मोटे तौर पर, द्वापर में राक्षस विवाह कहते थे, हालांकि दोनों में कुछ बेसिक डिफ़ेरेंस है। ‘राक्षस विवाह’ और ‘लड़की भगाने’ दोनों में प्रेम और सहमति हो होती है। लेकिन ‘लड़की भागने’ में यह जरूरी नहीं कि दोनों पक्ष शादी के लिए कानूनी रूप से eligible हो जबकि राक्षस विवाह में दोनों eligible होते हैं। केवल लड़की के गार्डियन की सहमति नहीं होती अथवा वह वहाँ उपस्थित नहीं होते। इसलिए कृष्ण ने ‘लड़की नहीं भगाया’ था बल्कि राक्षस विवाह किया था।  

विवाह के समय लड़की अपने होने वाले पति से सात वचन यानि प्रोमिस लेती थी, उसके गार्डियन से नहीं।  यानि लड़का विवाह के दायित्व संभालने के लिए सक्षम होना चाहिए। विवाह के लिए कोई कानूनी रुकावट नहीं थी। इसलिए कृष्ण का विवाह पूर्णतः विधिमान्य था।

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