किसान आंदोलन के तीन सीख

Ongoing किसान आंदोलन से मुझे तीन चीजें समझ आई है:

1. अगर आपके पास मर्सिडीज, बोलेरो, ट्रैक्टर, ट्रक नहीं है तो आप किसान नहीं हैं। बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, विदर्भ, बुंदेलखंड के सूखा, बाढ़, landslide, टिड्डा आदि से प्रभावित किसान, किसान नहीं हैं।

2. अगर आप में दिल्ली का दम फुलाने का दम नहीं है तब आप सही नहीं हैं। हो सकता है, नॉर्थ इस्टर्न स्टेट के लोग सही नहीं हो, क्योंकि वे ऐसा नहीं कर सके हैं।

3. भारत-पाकिस्तान युद्ध और अनाज के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता के आपातस्थिति में एमएसपी यानि मिनिमम सपोर्ट प्राइस सिस्टम शुरू किया गया था। अगर किसी को सपोर्ट देना है, तो उसमें स्किल डेवेलप करो, खेती करना सिखाओं, फ्री या सब्सिडी दोगे तो बाद में ऐसा ही आपातकाल आएगा जैसा कि अभी दिल्ली के सभी बॉर्डर पर आया हुआ है।

4. हम पराली जलाना नहीं छोड़ेंगे, वाटर हार्वेस्टिंग और वाटर conservation नहीं करेंगे, ITO पर निहत्थे पुलिस वालों को मारेंगे, टमाटर प्याज महंगे हो तो हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं, सरकार की है। कांट्रैक्ट लेबर, डेली वेजेज़ लेबर, रिक्शा चालक, प्राइवेट नौकरी वाले etc. किसी को पेंशन नहीं चाहिए। लेकिन हमें चाहिए क्योंकि हम ताकतवर हैं, हम बहुत सारे हैं।  

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