आत्म निर्भर

माँ-पापा बचपन से कहते थे, पढ़ लिख लो, अच्छी नौकरी मिल जाएगी, पैसे कमाओगी, आत्मनिर्भर बन जाओगी। तो, अब मैं आत्मनिर्भर बन गई। मैं पैसे कमाती हूँ। अब मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं हैं।

चाय, नाश्ता, खाना? माँ, मेड, कैंटीन, स्वीगी सब हैं न।

बर्तन, कपड़े, झाड़ू? मेड है, मशीन है, और हाँ अर्बन क्लैप भी हैं।

दोस्त, रिश्तेदार? अरे टाइम कहाँ है। ऑफिस, बॉस, कलीग, और मोबाइल, बहुत बिज़ि रहती हूँ।

घूमने-फिरने, सैर सपाटा? पैसे हैं, गाड़ी हैं, ड्राइवर है, मेक माइ ट्रिप है, सब कुछ तो फिंगर टिप पर हैं।

ब्यूटी केयर? ब्यूटीशियन, डीटीशियन, मसाज पार्लर, ब्यूटी पार्लर, सब हैं न इसके लिए, मेरे पास टाइम कहाँ कि उबटन लगाऊँ!

हेल्थ, फ़िटनेस? फिटनेस ट्रेनर, डायट प्लानर, फ़िटनेस ऐप, जिम सब हैं न इसके लिए। मैं पैसे कमाऊँ या एक्सरसाइज करूँ!

इमोशन, पर्सनल प्रोब्लंस, companionship etc.? इसके लिए सोशल साइटस हैं, मेट्रीमोनियल ऐप, डेटिंग ऐप सब हैं न। हां कभी कभी टाइम निकाल कर मेडिटेशन सेंटर भी चली जाती हूँ।

तो अब मैं पूरी तरह आत्म निर्भर हूँ। पैसे कमा लेती हूँ तो बन गई न आत्म निर्भर, सेल्फ defendant।    

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