अवतार क्या होता है?

अभी पूरा देश राममय हो रहा है। राम विष्णु के सातवें अवतार थे। लेकिन अवतार क्या होता है? अवतार का अर्थ है ‘अवतरण लिया हुआ शरीर’। तो फिर, अवतरण क्या है? अवतरण दो शब्दों से मिल कर बनता है, ‘अव’ और ‘तरण’। ‘अव’ का अर्थ है ‘कम’ ‘नीचे’ जैसे अवमान, अवगुण। ‘तरण’ का अर्थ होता है, ‘तैरना’- तरणताल। इसका आशय कहीं जाने या पहुँचने से भी होता है, अगर तैर कर पहुंचे नहीं तब तो डुबना हो जाएगा। इसलिए ‘अवतरण’ शब्द का अर्थ हुआ ‘नीचे’ या ‘कम’ होना। लेकिन भगवान कहाँ से नीचे आएगा? वह तो हर जगह है। वह अपने ‘ईश्वरत्व’ से नीचे उतर कर ‘मनुष्यत्व’ को ग्रहण करता है। शेप, टाइम और स्पेस से परे अपने अनादि अनंत और अरूप रूप को छोड़ कर इससे बंधे सीमित शक्ति वाले मनुष्य का रूप लेता है। पर उसका यह आना पतन नहीं है क्योंकि इसका उद्देश्य होता है उद्धार यानि upliftment। ईश्वर हमारे रूप में, हमारी भाषा में, हमारी परिस्थितियों में, आकर हमारा उद्धार यानि हमें ईश्वरत्व की तरफ उठाने का रास्ता दिखाता है। यही है अवतारवाद। इसीलिए अवतारी के कार्यों को लीला यानि कहते हैं।        

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